मित्र संजीव रंजन 'गाता जाए बंजारा ' की शरुआत करना चाहते थे और मैं भी इसकी तकनीकी प्रक्रिया में शामिल हो गया। ईमानदारी से कहूँ तो हम दोनों blogging के तक्नीकी जटिलताओ से वाकिफ नहीं है । हम दोनों को नौशिखिया ही समझा जाए। इसी चक्कर में हम ब्लॉग की जटिलताओं में फँस गए मगर blogging का भूत हम दोनों के सर पर इस कदर सवार है कि हमने सोचा 'गाता जाए बंजारा' को जारी रक्खा जाए । इसीलिए मित्रों, प्रोफाइल हमारा है लेकिन ज्यादातर आलेख मेरे प्रिय मित्र संजीव रंजन के रहेंगे। सहलेखन को आजकल साहित्य जगत में मान्यता मिल गयी है तो फ़िर blogging की दुनिया में क्यों नहीं। कभी-कभी मैं और हमारे अन्य मित्र भी इस ब्लॉग पर लिखा करेंगे।
अब संजीव रंजन 'गाता जाए बंजारा ' पर अपने ब्लॉग को पोस्ट कर इसका शुभारम्भ करेंगे।
Monday, March 9, 2009
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